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सावधान हो जाएं पत्रकार, ख़तरे में है उनकी पत्रकारिता

 

 

 

कानपुर महानगर में ही नहीं पूरे देश में चौथा स्तंभ कहा जाने वाला यह प्राणी जो पत्रकार कहलाता है आजकल खतरों में खेल रहा है।

 

दरअसल जब से भाजपा की सरकार देश में आई है तबसे पत्रकार नाम के इस प्राणी पर खतरा ज्यादा बढ़ गया है।

कभी पुलिस से तो कभी बदमाशों से और तो और नेताओं से भी सुरक्षित नहीं है चौथा स्तंभ।

 

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज के युग में यदि कोई पत्रकार स्वतन्त्र होकर कोई सच्चाई उजागर करता है तो सामने वाला उसका दुश्मन बन बैठता है। सामने वाला अगर दबंग है तो वह मारपीट पर आमादा हो जाता है अगर नेता है तो पुलिस ने मिलकर फर्जी मुकदमे दर्ज करवा देता है और यदि पुलिस है तो फिर कहना ही क्या उसके लिए गंभीर धाराओं में फर्जी मुकदमा लिखना मामूली बात है।

 

ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है कि पत्रकारों पर हो रहे हमले इस बात के सबूत हैं ।

अब हम आते हैं ताजे मामले पर जहां अभी हाल ही में कानपुर के टीवी न्यूज़ चैनल के संवाददाता को पिटवाने का आरोप इसी जिले के एक उच्च अधिकारी पर लगा था ।

अब हाल ही में दूसरा मामला जहांगीरपुर कानपुर देहात थाना सट्टी में देखने को मिला है। जहां एक व्यक्ति द्वारा कई पत्रकारों के खिलाफ डकैती की गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

हैरत की बात तो यह है कि स्थानीय प्रशासन ने मुकदमा लिखने में इतनी जल्दबाजी कर दी कि तहरीर के आधार पर किसी अन्य से कोई भी पूछताछ करना भी मुनासिब नहीं समझा। और घटना के दिन कानपुर में रहे पत्रकार को पुखरायां में मौजूद दिखाकर एक बेबुनियाद मुकदमा पत्रकार के ऊपर पंजीकृत कर लिया गया।

हैरानी इस बात की है कि जब कोई आरोप पुलिस पर लगता है तो पहले उसकी जांच की बात कही जाती है। कहा जाता है जांच कराई जाएगी तब मुकदमा पंजीकृत किया जाएगा।

ऐसे और भी कई मामले हैं जहां नेताओं पर कोई आरोप लगाता है तो पुलिस कहती है जांच की जाएगी जांच में मामला सही पाया जाएगा तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा। लेकिन न जाने पत्रकारों से क्या दुश्मनी थी पुलिस को कि बिना किसी जांच पड़ताल के पत्रकार के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इससे तो यही लगता है कि थाना पुलिस की भी सांठगांठ है।

 

छै पत्रकारों पर मुकदमा लिखने से पहले इस बात की पुष्टि क्यों नहीं की गई कि वादी सही कह रहा है या झूठी रिपोर्ट लिखा रहा है।

 

आश्चर्य की बात यह है कि उक्त पत्रकार कानपुर नगर में मौजूद था लेकिन पुलिस ने पत्रकार को पुखरायां में मौजूद दिखाकर एक बेबुनियाद मुकदमा पत्रकार के ऊपर पंजीकृत कर लिया।

पत्रकार विजय यादव को जैसे ही इसकी जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने इस घटना से अपने अन्य साथियों को अवगत कराया जिससे पत्रकार जगत के कई हस्तियों ने इस मामले को संज्ञान में लिया और बड़े अधिकारियों से इस मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही ।

 

पत्रकारों के हित में काम करने वाली संस्था ऑल इंडियन रिपोर्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पत्रकार के ऊपर लिखे गए इस फर्जी मुकदमे को बंद करने की मांग की है और साथ ही उच्च अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर पुलिस द्वारा पत्रकारों के ऊपर इस तरह के फर्जी मुकदमे लिखना बंद नहीं किया जाते तो पूरे देश में आईरा से जुड़े पत्रकार एक साथ होकर पूरे देश और शहर में धरना प्रदर्शन करने पर बाध्य हो जाएंगे।

 

हर पत्रकार का यह अधिकार होता है कि समाज में फैली बुराइयों को उजागर करें व निष्पक्षता से सच्चाई लिखे और दिखाएं।

बदले में आप उसे शाबाशी ना दे तो कम से कम उसे हतोत्साहित भी ना करें और सच्चाई दिखाने पर उस पर फर्जी मुकदमा दर्ज न करें।

 

लेकिन आज के दौर में पत्रकारों में अगर कोई ईमानदारी दिखाता और सच्चाई को उजागर करता है तो पुलिस, नेता, दबंग, सब मिलकर उसके खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं मजे की बात यह है कि चाहे जितना पत्रकार चिल्लाते रहे चाहे लिखते रहें मौजूदा सरकार पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं होता। बहुत बात बढ़ती है तो एक बयान दे दिया जाता है कि सरकार पत्रकारों का दमन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

 

अब देखना यह है कि कानपुर देहात पुलिस प्रशासन इस मामले में पत्रकार के साथ न्याय करता है या उसे फर्जी मुकदमे में जेल भेजता है।

अगर ऐसा हुआ तो निश्चित ही आईरा संगठन जिसके विजय यादव सदस्य हैं । उनके साथ खड़े होकर उनके पक्ष में एक व्यापक आंदोलन करेगी।

 

 

एम आई हाशमी इंडिया हेड अल्फाज़ की स्वतंत्रता (AKS).

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