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देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफ़ेसर एमपी सिंह ने पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि दी!!

 

फरीदाबाद से हृदयेश कुमार 14 फरवरी 2021

देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफ़ेसर एमपी सिंह ने पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मैं भारतीय आम नागरिक हूं मैं राजनीतिक नहीं हूं मैं अपने देश के सैनिकों रक्षकों का हृदय से सम्मान करता हूं क्योंकि जवान हमारी रक्षा व सुरक्षा करते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा कौन करता है यह मैं जानना चाहता हूं आमने सामने की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हो जाए समझ में आता है, लेकिन किसी षड्यंत्र के शिकार हो जाए या कायराना हमले में हताहत हो जाए तो बिल्कुल समझ में नहीं आता है ,छल कपट से किया गया कार्य हमेशा निंदनीय होता है चोरों की तरह हमला नहीं पहलवान और मर्दों की तरह लड़ाई लड़नी चाहिए, परिणाम चाहे कुछ भी हो,प्रतिवर्ष फौज व सेना में भर्ती होने वालों की संख्या में इसीलिए गिरावट आ रही है ,रक्षा सुरक्षा पर अनेकों प्रकार के प्रश्न उठने लगे हैं मैं तो देश शुभचिंतक हूं इसलिए यह चिंतन की बात लिख रहा हूं ताकि पढ़कर किसी को कुछ समझ आ सके और भविष्य में बेहतर फैसले लिए जा सके वैसे तो सही कलम कारों को कौन पूछता है बल्कि सही लिखने के बाद खतरों का सामना भी करना पड़ता है लेकिन अच्छे राजा महाराजा सही की कद्र करते हैं क्योंकि वह निस्वार्थ आई ओपनर होते हैं उन्हें इसके बदले कोई पद प्रतिष्ठा नहीं मिल रही होती है बल्कि देश प्रेमी ही सही स्थिति से अवगत करा सकता है अन्यथा चापलूस पुरुषों की भीड़ की कोई कमी नहीं है मेरे मन में बार-बार प्रश्न आता है कि इतनी चौक चौबंद व्यवस्था के बाद भी इस प्रकार के हमले कैसे हो जाते हैं कहां से आरडीएक्स आ जाता है कौन आरडीएक्स दे देता है फिर हमारी खुफिया एजेंसी क्या कर रही होती है उनका क्या काम होता है इतनी बड़ी बड़ी तनखा उनको किस लिए दी जाती है रिपोर्टिंग व मॉनिटरिंग में कहां कमी रह जाती है कौन अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा होता है और क्यों, क्या उसके लिए कोई कानून नहीं है क्या हम अपने वीर सपूतों को इसी प्रकार से गमाते रहेंगे क्या हम धमकी ही सुनते व स्वीकारते रहेंगे मुझे यह लिखते हुए आत्मग्लानि हो रही है कि राजनीतिक पदों को हथियाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति को तो अपना लेते हैं लेकिन देश की एकता अखंडता समृद्धि मजबूती के लिए मौन बनकर रह जाते हैं प्रदेश में अप्रिय घटनाएं घटित हो रही हैं भारतीय वीरों की अनमोल जाने जा रही हैं कभी कहीं पत्थरबाजी हो रही है तो कभी प्राकृतिक और मानवीय आपदाओं का शिकार हो रहे हैं हमारी बहन बेटियां विद्यार्थी अधिकारी कर्मचारी सेवादार नेता अभिनेता साहित्यकार छायाकार कोई भी तो सुरक्षित नहीं है कहीं प्रकृति को उजाड़ा जा रहा है तो कहीं सड़क पर नंगा नाच हो रहा है सरेआम लूट खसोट मर्डर रेप अनैतिक शोषण व दोहन हो रहा है उक्त समस्याओं का हल कौन निकालेगा कहां से निकलेगा कैसे अमल में लाया जाएगा यह चिंतन का विषय है राजनेताओं को स्वार्थी व निर्मम नहीं होना चाहिए अपनी सोच आचरण व विचार ठीक रखने चाहिए सोशल मीडिया हो या चौराहों की बहस भावनाओं में नहीं आना चाहिए सत्य को जानना व मानना चाहिए सवाल पूछना ठीक होता है और हमेशा उसका सही जवाब ही देना चाहिए बदले की भावना विपक्ष परिपेक्ष में नहीं देना चाहिए, सोचना चाहिए कि देश हम सभी का है इसका सम्मान करना हम सभी का नैतिक दायित्व है आपको अपने परिवार, अपनी जाति, अपना शहर, अपना राज्य अपना संप्रदाय अपना धर्म और आरक्षण से ऊपर उठकर सोचना चाहिए लेखक देश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक अनेकों पुस्तकों के लेखक प्रोफेसर एमपी सिंह है यह मेरे स्वतंत्र विचार हैं
कैफी सुल्तान की खबर
दूरदर्शन News24
इंडिया क्राइम ब्यूरो संपादक

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